Web 3.0 क्या है, और यह क्रिप्टो करेंसी से किस प्रकार संबंधित है-

Web 3.0 क्या है, इस समय टेक्नोलॉजी का विकास जिस तेजी से हो रहा है उसके साथ साथ यह हमें इस क्षेत्र में बेहतर भविष्य बनाने की अपार संभावना भी प्रदान कर रहा है। इंटरनेट की मदद से संसार का लगभग हर व्यक्ति टेक्नोलॉजी को और आसानी से समझ कर उसका उपयोग करने में अब और बेहतर होता जा रहा है।

अब से कुछ समय पहले जहां हमारे पास सीमित टेक्नोलॉजी हुआ करती थी वही आज संसार इस क्षेत्र में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रतिदिन कुछ नई नई चीजों से हमारा परिचय होता रहता है, अगर हम क्रिप्टोकरंसी वर्ल्ड की बात करें तो इसने एक नए विकेंद्रीकृत भुगतान प्रणाली और NFT (Non Fungible Taken) को जन्म दिया, जिस पर अब तक किसी भी गवर्नमेंट का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन हमारी भारत सरकार क्रिप्टो करेंसी जैसे जटिल विषय पर सकारात्मक दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।

भारत में क्रिप्टो करेंसी का भविष्य

अगर हम ध्यान दें कि जब से हम इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं तब से इसमें बहुत सारे परिवर्तन किए जा चुके हैं जैसे शुरुआत मैं हम कंप्यूटर/मोबाइल से केवल लिखित मैसेज ही भेज सकते थे लेकिन समय के साथ-साथ हम कंप्यूटर/मोबाइल का इस्तेमाल वॉइस कॉलिंग और इसके बाद वीडियो कॉलिंग करने में भी सक्षम हो पाए, जिसका इस्तेमाल हम पिछले कई वर्षों से करते आ रहे हैं।

जिस प्रकार कंप्यूटर/मोबाइल में इस्तेमाल किए जाने वाले एप्लीकेशंस को समय-समय पर अपग्रेड किया जाता है जिसमें पुरानी हो चुकी फीचर्स को हटाकर नए फीचर्स जोड़ दिए जाते हैं, उसी प्रकार अब समय आ चुका है पुरानी और पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट के अपग्रेड होने की जिसको नाम दिया गया है Web 3.0। किसके बारे में जानने से पहले हम Web 1.0 और Web 2.0 के बारे में जान लेते हैं।

Web 1.0 क्या है।

ऐसा माना जाता है कि वर्ष 1991 से 2004 तक इस्तेमाल किए जाने वाले इंटरनेट को Web1.0 कहा जाता है। इसमें जब कोई ब्लॉगर या इंटरनेट उपयोगकर्ता इंटरनेट पर कोई सामग्री डालता था तो उस सामग्री को पढ़ने वाले यह देखने वाले उपयोगकर्ता कोई Reply या Comment या फिर किसी भी प्रकार का Interaction नहीं कर पाते थे। मतलब हम यह कह सकते हैं कि Web 1.0 में One side interaction ही रहता था और जो चीजें किसी ब्लॉगर या डेवलपर के द्वारा इंटरनेट पर डाली जाती थी वह उसी प्रकार इंटरनेट पर पड़ी रहती थी और इनमें कोई फेरबदल नहीं की जा सकती थी।

Web 2.0 क्या है।

वर्ष 2004 से अब तक इस्तेमाल किए जाने वाले इंटरनेट को Web 2.0 कहां जाता है। इसमें Web 1.0 की तुलना में बहुत सारी चीजों में परिवर्तन किया गया जैसे- इंटरनेट पर उपलब्ध किसी आर्टिकल या वीडियो पर अब लोग Reply या Comment करने में सक्षम हो गए।

इसी समय पूरा विश्व सोशल मीडिया जैसे- ( facebook ,twitter instagram, WhatsApp etc.) से भी परिचित हुआ जिस पर डाले गए किसी पोस्ट या फोटो को like और share
करके एक दूसरे से connect हो सकने लगे। यह Two side interaction technology और Centralised तरीके से काम करता है, जिसका इस्तेमाल आज भी हम लोग कर रहे हैं।

Web 1.0 और Web 2.0 की कमियां-

अब तक इस्तेमाल किए जाने वाले Web 1.0 और Web 2.0 में बहुत सारी कमियां हैं जैसे- जब हम किसी वेबसाइट या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं तो वहां पर अपना महत्वपूर्ण डाटा/जानकारी डालकर अकाउंट बनाते हैं तब Sign Up/Log in होते हैं और इस प्रकार इन बड़ी-बड़ी कंपनियों के पास में बहुत ज्यादा मात्रा में डाटा इकट्ठा होता रहता है। आए दिन इन कंपनियों के हैक हो जाने की या हमारे द्वारा इन कंपनियों को दिए गए महत्वपूर्ण डाटा के गलत इस्तेमाल की संभावना बनी रहती हैं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए Web का एडवांस वर्जन Web 3.0 का इस्तेमाल बहुत जल्द ही शुरू Web 3.0 क्या है की संभावना है।

Web 3.0 क्या है

उपरोक्त जानकारी के आधार पर हम यह कह सकते हैं की ” Web 3.0 इंटरनेट का एडवांस वर्जन है जो Blockchain जैसी technology का इस्तेमाल करके इंटरनेट पर मौजूद वेब कंटेंट को और भी ज्यादा सुरक्षित रखेगा। इसका उद्देश्य decentralised तरीके से इंटरनेट उपयोगकर्ता का डाटा किसी किसी एक कंपनी के पास न रहकर Web 3.0 का इस्तेमाल करने वाले हर उपयोगकर्ता के पास रहेगा जो एक विशेष कोडिंग के माध्यम से लॉक रहेगा, जिसको हैक करना लगभग नामुमकिन होगा। यह पूरी तरह बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी द्वारा अपनाई जाने वाली Blockchain technology के तर्ज पर काम करेगी जो क्रिप्टो करेंसी जैसी डिजिटल करेंसी को बढ़ावा देंगी और इसे समझने में मदद करेंगी।

Web 3.0 क्रिप्टोकरंसी प्रोजेक्ट–

1.Helium
2. Filecoin
3.ICP
4.Polkadot
5.Kusama
6.Ocean Protocol

Web 3.0 क्या है, पर लिखा गया आर्टिकल आपको कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताएं।

Leave a Comment